हिंदू धर्म में दान को आत्म-त्याग और परोपकार का एक अभिन्न अंग माना जाता है।

दान की परिभाषा

दान को धर्म का एक मूलभूत स्तंभ माना जाता है, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक शुद्धि प्रदान करता है।

धार्मिक महत्व

हिंदू विश्वास के अनुसार, दान व्यक्ति के कर्म को सुधारता है और पुनर्जन्म में बेहतर जीवन प्रदान करता है।

कर्म और पुनर्जन्म

दान के माध्यम से धनी और गरीब के बीच की खाई को पाटने का प्रयास किया जाता है।

सामाजिक समरसता

हिंदू त्योहारों में दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है, जैसे दिवाली, नवरात्रि।

त्योहारों में दान

अन्न, वस्त्र, ज्ञान, रक्त और अंग दान जैसे विभिन्न प्रकार के दान हिंदू धर्म में प्रचलित हैं।

विविध प्रकार के दान

हिंदू शास्त्रों में अष्टम विधि दान का वर्णन है, जो दान के आठ प्रकारों को बताता है।

अष्टम विधि दान

गीता, उपनिषद्, और पुराणों में दान के महत्व को विस्तार से बताया गया है।

ग्रंथों में दान

दान करने से न केवल सामाजिक बल्कि व्यक्तिगत विकास भी होता है।

व्यक्तिगत विकास

आज के युग में दान डिजिटल तरीकों से भी किया जाता है, जिससे इसकी पहुंच और भी व्यापक हो गई है।

आधुनिक संदर्भ