सूरज में हुआ 60 पृथ्वी के बराबर गड्ढा, क्या धरती पर आ रहा बड़ा खतरा?

Sun Coronal Hole: सूरज, हमारे ब्रह्मांड की एक महत्त्वपूर्ण स्रोत है, जिसका हमारी प्राकृतिक जीवन और तकनीकी उन्नति में बहुत महत्व है। हाल ही में हुए एक चौंकाने वाले घटनाक्रम में, सूरज की सतह पर एक बड़ा गड्ढा पाया गया है, जिसका आकार लगभग 60 पृथ्वियों के बराबर है। इस अत्यंत बड़े गड्ढे के कारण, सौर तरंगें निकल रही हैं, जिससे पृथ्वी को एक महत्त्वपूर्ण खतरा भी हो सकता है।

सूरज का एक बड़ा गड्ढा होने से जुड़ी चिंताएं और संभावित खतरे के बारे में बात करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह घटना वैज्ञानिक समुदायों के ध्यान में है क्योंकि इससे धरती पर सौर तरंगों के प्रभाव का खतरा बढ़ सकता है। खगोलशास्त्री बताते हैं कि सूर्य के गतिविधियों में एक बड़ा छेद बनने से सोलर तरंगें निकल रही हैं, जो हमारी धरती के विभिन्न संचार और नेविगेशन सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं।

Coronal Hole: सूरज का एक बड़ा गड्ढा

नासा द्वारा किया जा रहा अध्ययन इस बड़े गड्ढे को ‘कोरोनल होल’ कहा जा रहा है, जिससे सूर्य की सतह से सोलर तरंगें हमारी धरती की ओर आ रही हैं। इससे पृथ्वी के रेडियो और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम पर असर पड़ सकता है।

इसके पहले, सूर्य की गतिविधाओं के बढ़ते तरंगों की चुनौती बनती रहेगी, जो धरती के संचार सिस्टम को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि वर्तमान में इस गड्ढे का पृथ्वी के लिए कोई सीधा खतरा नहीं है, क्योंकि यह धरती से दूर है।

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कोरोनल होल बनने का कारण

नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) के वैज्ञानिकों के मुताबिक जब सूरज की मैग्नेटिक फील्ड अचानक फट जाती है, तब कोरोनल होल्स बनते हैं। यह मैग्नेटिक फील्ड सूरज को एक ही जगह पर थामे रखती है। मैग्नेटिक फील्ड के फटे हुए एरिया में गैप हो जाता है और इस गैप वाली जगह पर एक गहरे रंग का गड्ढा हो जाता है। फिर इस गड्डे से तेजी से रेडिएशन निकलते हैं।

GPS सिग्नल और वायरलेस नेटवर्क प्रभावित होने की संभावना

वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोनल होल का अचानक इतना इतना बड़ा होना चिंता की बात है। इससे निकल रहे रेडिएशन और रेडिएशन की तेज तरंगें बेहद तेज गति से पृथ्वी कीओर बढ़ रही है। इन तरंगों से पृथ्वी पर GPS सिस्टम और वायरलेस नेटवर्क उपकरण प्रभावित होने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि फिलहाल इससे इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क और बिजली की लाइनों पर किसी भी प्रकार का असर होने की आशंका नहीं है।

आदित्य एल 1: सूर्य की प्रमुख धारा

सूर्य हमारी प्राकृतिक जीवनरेखा का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। इसके बिना, पृथ्वी पर जीवन की संभावनाएं हो सकती हैं। इस दृष्टि से, भारत ने भी सूर्य के रहस्यों को समझने के लिए अपना पहला मिशन ‘आदित्य एल 1’ भेजा है। इसके अलावा, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा भी सूर्य के गहराईयों की अध्ययन की जा रही है।

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गड्ढे का अंत और संभावित प्रभाव

खगोलशास्त्री यह बता रहे हैं कि कोरोनल गड्ढा एक दिन के भीतर अपने चरम आकार तक पहुंच गया है और पृथ्वी से सीधे सामना कर रहा है। यह घटना सूर्य के 11-वर्षीय गतिविधि चक्र के चरम पर हो रही है, जिसे सौर अधिकतम के रूप में जाना जाता है। इसका अंत 2024 में हो सकता है।

शुरुआत में डर था कि सूर्य से आने वाली हवाएं बहुत तेज हो सकती थीं, जो 500 से 800 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से चलती हैं। ये हवाएं एक बीच वाली G2 तूफान को उत्पन्न कर सकती हैं, जिससे रेडियो बंद हो सकते थे। लेकिन वैज्ञानिकों ने बताया कि हवाओं की तेजी थोड़ी कम थी, और इससे सिर्फ कमजोर G1 तूफान आया। इसके बावजूद, उन्नत इलाकों में ध्रुवीय दिखावे की सम्भावना थी।

जब तक इस छिद्र का अंत नहीं होता, हमें इस पर नजर जमी रखनी चाहिए क्योंकि इससे सूर्य द्वारा उत्पन्न होने वाली गतिविधियों का सीधा प्रभाव हो सकता है। सूर्य के गतिविधाओं का अध्ययन और समझना हमारी धरती के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे हमें सौरमंडल की प्रकृति को समझने में मदद मिलती है, और यह जानने में सहायता करता है कि कैसे हम इसके प्रभावों से निपट सकते हैं।

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