Saphala Ekaadashi: आईए जाने सफला एकादशी व्रत के बारे में, साथ हि इस व्रत से श्री हरि को प्रसन्न करे

Saphala Ekaadashi: सफला एकादशी व्रत साल 2024 का पहला एकादशी व्रत है। यह व्रत 7 जनवरी को यानी आज है। यदि किसी इच्छित कार्य में सफलता प्राप्त करनी है, तो फिर आपको सफला एकादशी व्रत करना चाहिए। इस व्रत की मान्यता है कि सफला एकादशी व्रत को करने से भगवान विष्णु प्रसन्न हो होते हैं। और साथ ही साथ कार्य में सफलता प्रदान करते हैं। इस व्रत को करने से भगवान विष्णु के असीम कृपा होती है।यह भी कहा जाता है कि सप्लाई एकादशी व्रत को करने के दौरान व्रत कथा भी जरूर पढ़ना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि व्रत का विशेष लाभ मिलता है।

आइये जाने सफला एकादशी व्रत की पूजा मुहूर्त और पारण का समय

सफला एकादशी व्रत 07 जनवरी 2024 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार 7 जनवरी के दिन मनाई जएगि। पंचांग के अनुसार 7 जनवरी के दिन 12:41 a.m से एकादशी शुरू होगी, दूसरे दिन 12:46 a.m तक रहेगी।

सफला एकादशी व्रत कथा का महत्व

पुरानी कथाओं के अनुसार,राजा महिष्मान चंपावती नगरी के राजा थे। उनके सबसे बड़े बेटे लुम्पक दुराचारी था। उनके बेटे का स्वभाव बहुत ही चिंता जनक था। लुम्पक दुराचारी प्रतिदिन मांस- मंदिर का सेवन करता था और संत,ऋषि, मुनि,देवी-देवता आदि का अपमान भी करता रहता था। उसके इस व्यवहार से राजा काफी परेशान थे। और उसकी इसी व्यवहार के कारण राजा ने उसे महल से निकाल दिया। इसके पश्चात वह और चोरी करने लगा तथा उसकी आदतों से नगरवासी भी परेशान हो गए थे। उस नगर के पास ही एक वन मे पीपल का पेड़ था। और उसे पीपल पेड़ की लोग पूजा करते थे।

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लुम्बक को जब महल से निकाल दिया गया तो वह इसी पेड़ के नीचे रहने लगा। जब वह पेड़ के नीचे रहने लगा तब उसे ठंड लगने का महसूस होने लगी। उस समय पौष माह चल रहा था और उसके पास उस ठंड से बचने के लिए पर्याप्त कपड़े नहीं थे। और ठंड के कारण उसका शरीर अकड़ चुका था। फिर सुबह एकादशी को जब सूरज निकला तो दोपहर में उसे गर्मी महसूस हुई तो उठा, परंतु उसके बाद उसे भूख महसूस होने लगा।

खाने की तलाश में वह जंगल में भटकने लगा। समय बितता गया तथा वह भूख और प्यास से बहुत कमजोर हो गया था, इस कारण वह शिकार भी नहीं कर पा रहा था। फिर वह फल लेकर इस पीपल पेड़ के नीचे आ गया,तब तक अंधेरा हो चुका था। और उसने बोला, हे-नाथ या फल आपको निवेदित है आप इन्हें खुद ही खाओ, वह सारी रात जागता रहा,तथा उसने अपने पाप कर्मों से खुद को कोश रहा था और पश्चाताप भी कर रहा था। वह भगवान से क्षमा मांगने लगा था।

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श्री हरि विष्णु भगवान ने अनजाने में किए हुए व्रत से प्रसन्न हो गए। उन्होंने लुम्बक के पापों को नष्ट कर दिया। तभी एक ऊंचे स्वर में आवाज आई, हे- लुम्बक तुम्हारे पिछले सभी पाप नष्ट कर दिए गए हैं अब तुम अपना महल लौट जाओ और अपने पिता की राज-काज में मदद करो और राजा का पद धारण करो।

लुम्बक ने भगवान विष्णु के नाम का जयकारा किया और अपने महल लौट गया।फिर उसके पिता ने उसे राजा बनाया और राजकाज का कार्य करने लगा। वह धर्म के मार्ग पर चलने लगा। फिर एक दिन उसका विवाह एक योग्य और सुंदर कन्या से हुआ। उसे एक अच्छी संतान मिली। भगवान श्री हरि विष्णु की कृपा से जीवन के अंत में उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। ऐसा माना जाता है कि जो व्यक्ति सफला एकादशी व्रत रखकर विष्णु पूजा करता है उसे जीवन में सफलता मिलती है और मोक्ष प्राप्त होता है।

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