इस बार बेहद खास रहेगा पौष प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि के साथ बन रहा है संयोग

Pradosh Vrat 2024: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत महत्व माना जाता है। वैसे ही साल के 12 महीने में प्रत्येक महीने प्रदोष का व्रत भी भगवान शंकर के निमित्त रखा जाता है। इस दिन शिव जी और माता पार्वती की पूजा का विधान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि में रखा जाता है। ऐसी मान्यता हैं कि जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रदोष व्रत रखता है और भगवान शिव की उपासना करता है उसे दुख दरिद्रता, संकट, रोग, कर्ज से छुटकारा मिलता है।

प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत रखने से पापों एवं कष्टों से मुक्ति प्राप्ति भी होती है। इस दिन पूजा पाठ करने से दरिद्रता का नाश होता है, घर में सकारात्मक ऊर्जा का निवास होता है, इसके अलावा विवाह में आ रही बाधा दूर होती है। यदि कोई व्यक्ति इस दिन का व्रत रख कर भगवान भोले के निमित्त रुद्राभिषेक करता है, तो शीघ्र ही उसकी शादी के योग बनने की अधिक संभावना रहती है।

Also Read: Bhaum Pradosh Vrat 2024: भगवान शिव के साथ हनुमान जी की रहेगी विशेष कृपा, जानें भौम प्रदोष व्रत की तिथि, महत्व और विशेष उपायों के बारे में

मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत एक साथ

इस बार प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि व्रत दोनों एक ही दिन आ रहे हैं। प्रदोष व्रत और मासिक शिवरात्रि व्रत का संयोग बेहद सुबह माना जाता है। पूर्व जन्म के पापों एवं कष्टों से मुक्ति पाने के लिए इस दिन का खास महत्व है, और इस दिन भगवान शिव की पूजा करने वालों भक्तों को दोगुना लाभ प्राप्त होता है। इस तरह के खास सयोंग से यह व्रत एक भौम प्रदोष व्रत होगा, जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और समृद्धि के लिए बेहद लाभदायी होगा।

पंचांग के अनुसार पौष माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 8 जनवरी 2024 को रात 11 बजकर 58 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 9 जनवरी 2024 को रात 10 बजकर 24 मिनट पर इसका समापन होगा। 9 जनवरी 2024 को रात 10.24 के बाद चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी, जो कि 10 जनवरी रात 08.10 मिनट तक रहेगी। ऐसे में शिवरात्रि का व्रत करने वाले मासिक शिवरात्रि की पूजा देर रात 12.01 से देर रात 12.55 के शुभ मुहूर्त में कर सकते हैं। इसके अलावा इस बार प्रदोष व्रत मंगलवार के दिन पड़ेगा, जो कि भौम प्रदोष के रूप में जाना जाता है।

Also Read: Hanuman ji: पांचों भाइयों ने बसाई गृहस्थी, हनुमान जी ने श्री राम की भक्ति में बिताया सम्पूर्ण जीवन

प्रदोष व्रत की पूजा विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)

  • प्रदोष व्रत के दिन स्नान के बाद स्वच्छ, सफेद रंग के कपड़े पहने।
  • इसके बाद भगवान की चौकी को रंगीन कपड़ों से सजाएं।
  • चौकी पर सबसे पहले भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें, इसके बाद शिव-पार्वती की मूर्ति को प्रतिस्थापित करें और विधि-विधान से पूजा करें।
  • इसके बाद ओम उमा सहित शिवाय नमः मंत्र का 108 बार जाप करते हुए भगवान को नैवेध अर्पित हवन करें।
  • इसके बाद कथा सुनें और आरती करें।

Also Read: हाथ जोड़कर प्रणाम करने से होती है, इन धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक लाभों की प्राप्ति, जानें प्रणाम करने का सही तरीका

भगवान शंकर की पूजा-अर्चना के लिए मंत्र

भगवान शंकर की पूजा-अर्चना के लिए मंत्रों में नमस्कार मंत्र और श‍िव नामावली मंत्र शामिल है। यह निम्नलिखित है।

श‍िव नमस्कार मंत्र

शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।।

ईशानः सर्वविध्यानामीश्वरः सर्वभूतानां ब्रम्हाधिपतिमहिर्बम्हणोधपतिर्बम्हा शिवो मे अस्तु सदाशिवोम।।

श‍िव नामावली मंत्र

  • श्री शिवाय नम:
  • श्री रुद्राय नम:
  • श्री महेश्वराय नम:
  • श्री शंकराय नम:
  • ओम पार्वतीपतये नम:
  • श्री सांबसदाशिवाय नम:
  • ओम नमो नीलकण्ठाय नम:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *