सर पर हिजाब, पीठ पर राममंदिर की तस्वीर, हाथों में भगवा ध्वज और राम नाम के जपते हुए रामलला के दर्शन करने पैदल यात्रा पर निकली रामलला की मुस्लिम भक्त

धर्म का असली अर्थ है, सच्चाई की तलाश और प्रेम का संदेश। यही सिखाता है हमें मुंबई से पैदल चलकर रामलला के दर्शन करने निकली एक मुस्लिम भक्त की कहानी। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी बताती है कि भक्ति मानवता की ऊँची सीमा है, जो कि धर्म के सीमा से परे है।

22 जनवरी 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा होने वाली है। इस अवसर पर को लेकर पूरे देश में खुशी का माहोल है। हर कोई रामलला की भक्ति में लीन दिखाई दे रहा है। देश भर के कोने-कोने से लोग इस प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल होने के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं। इनमें से रामलला की एक अनोखी मुस्लिम भक्त बेहद चर्चा में है।

भक्ति और जज्बे को देख लोग हुए आश्चर्यचकित

सिर पर हिजाब पहने शबनम ने अपने हाथ में बजरंगबली का भगवा ध्वज उठा रखा है, उनकी पीठ पर राम मंदिर की तस्वीर लगी हुई है और राम नाम लेते हुए शबनम रामलला के दर्शन करने के लिए पूरी आस्था के साथ अयोध्या की ओर निकल पड़ी है। इस मुस्लिम युवती की भक्ति और जज्बे को देख लोग आश्चर्यचकित है और उनका सभी भक्तों ने स्वागत किया है।

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मुंबई से अयोध्या तक की पैदल यात्रा

शबनम की यह पैदल यात्रा मुंबई से अयोध्या तक की होने वाली है। वह मुंबई-आगरा रोड से रामलला के दर्शन के लिए अपने जत्थे के साथ पैदल निकली हैं। शुक्रवार तक वह लगभग 400 किमी की दुरी तय कर खरगोन जिले के कसरावद फाटे पर पहुंच गई है। जैसे-जैसे शबनम अयोध्या के नजदीक बढ़ती जा रही हैं, उनकी सुरक्षा के लिए हर थाना इलाके से एक पुलिस का वाहन और पुलिस जवान और चल रहा है।

राम भक्त ही नहीं बल्कि कृष्ण भक्त भी है, शबनम

शबनम शेख राम भक्त ही नहीं बल्कि कृष्ण भक्त भी है। वह अक्सर मंदिरों में भगवान के दर्शन करने जाती है। शबनम का कहना है कि वह बचपन से ही रामायण और महाभारत जैसी पौराणिक सीरियल देखते हुए बड़ी हुई है। भगवान श्री राम को वह अपना आदर्श मानती है और खुद को भारतीय सनातनी मुसलमान कहती है। शबनम हिन्दू मुस्लिम दोनों ही समुदाय के लोगों के लिए उदाहरण है।

शबनम ने मुस्लिम भक्त की यात्रा ने धार्मिक सहिष्णुता और समर्थन की मिसाल प्रस्तुत की। उन्होंने अपने निष्ठावानी भावनाओं के साथ रामलला के दर्शन करने का निर्णय लिया, जिससे सामाजिक समरसता और एकता का संदेश दिया है।

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उनका यह महान कदम है जो धर्मगत विभाजनों को पार कर, समरसता और एकता की दिशा में हमें आगे बढ़ाने का संदेश देता है। इससे हमें यह सिखने को मिलता है कि हर धर्म की भक्ति में समानता होती है और प्रेम की भावना हर किसी मन में बसी होती है।

समाज में धर्म की भावनाओं पर खेली जाने वाली सियासत के बीच, इस मुस्लिम भक्त ने अपनी निष्ठा और समर्पण से एक अद्वितीय संदेश दिया है। उनकी यात्रा ने धार्मिक समर्थन की मिसाल प्रस्तुत की और सिद्ध किया कि सच्ची भक्ति में कोई भी विभाजन नहीं होता। धर्म के नाम पर हो रहे विवादों में उन्होंने एक महत्त्वपूर्ण संदेश दिया कि हम सभी एक ही परमात्मा की संतान हैं।

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