फिल्मों के लिए नहीं बल्कि मदद के लिए गिनीज बुक में दर्ज है Mahesh Babu का नाम

Mahesh Babu:- प्रिंस ऑफ़ टॉलीवुड कहे जाने वाले महेश बाबू टॉलीवुड के एक सुपरस्टार है। महेश बाबू तेलुगू सिनेमा के हाईएस्ट पेड स्टार हैं। उनकी फिल्में जब थिएटर में रिलीज होती है तो फैंस उनके पोस्टर्स को दूध से नहलाते हैं जी हां यही नहीं इसके अलावा खूबसूरत ढोल नगाड़े भी बजते हैं। टॉलीवुड के एक्टर्स में यह बात देखने को मिली है, कि वे लोगों की मदद करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। महेश बाबू की भी एक ऐसी ही आदत है और इनका हेल्पिंग नेचर उनके नाम को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने के लिए काफी था। तो चलिए आज हम आपको महेश बाबू से जुड़े कुछ इंटरेस्टिंग बातें बताते हैं।

Mahesh Babu द स्टार ऑफ साउथ इंडस्ट्री

साउथ इंडस्ट्री में महेश बाबू को लोग भगवान की तरह पूजते हैं। इनका पूरा नाम घटा मानिनी महेश बाबू है। वह तेलुगू सिनेमा के सुपरस्टार घट्टामामनी कृष्ण के बेटे हैं। महेश बाबू ने 4 साल की उम्र में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट एक्टिंग डेब्यू किया था इसके बाद उन्होंने करीबन 8 फिल्में की और फिर 1999 में फिल्म रजा कुमारुदु से लीड हीरो के रूप में डेब्यू किया।

इस फिल्म के लिए महेश बाबू ने बेस्ट मेल देबू का नंदी अवार्ड भी जीता थ। इसके बाद महेश बाबू ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और पोकिरी भारत अने नेनु जैसे कई सारी फिल्में की। महेश बाबू ने 44 साल के करियर में इतने फैंस कम लिए कि उन्हें सिर्फ आंखों पर बैठाए रखते हैं और पूछते हैं तेलुगु भाषा न आने की कमी को भी फैंस ने नजर अंदाज कर दिया फैंस महेश बाबू को पूछते हैं और आंध्र प्रदेश में उनका मंदिर भी बनवाया है उनका यह मंदिर आंध्र प्रदेश के कोंडापुरम में बनवाया गया था जिसमें एक्टर की बड़ी सी मूर्ति स्थापित की गई है।

नहीं आती तेलगु

महेश बाबू की फिल्म पोकिरी के नाम तेलुगू की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म का रिकॉर्ड दर्ज है। इस फिल्म को बेस्ट पॉप्युलर फिल्म का नेशनल अवार्ड मिला था महेश बाबू की और भी कई फिल्में है जिसने पर्दे पर खूब कमाई की लेकिन आपको यह बात कर हैरानी होगी कि महेश बाबू को तेलुगु भाषा बिल्कुल भी नहीं आती है।

उनके परिवार में हर किसी को या भाषा आती है लेकिन महेश बाबू को यह भाषा बिल्कुल नहीं आती। तेलुगु भाषा न आने के इस कमी को महेश बाबू ने अपने करियर पर हावी नहीं बनने दिया। रट्टा लगाकर डायलॉग याद करते थे यह तब की बात है जब महेश बाबू ने फिल्मों में कदम रखा तब वह तेलुगु भाषा के डायलॉग का मीनिंग समझकर उन्हें रखने और फिल्म स्क्रीन पर बोलते थे।

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