राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्म स्थान पोरबंदर में 108 कुंडिय गायत्री महायज्ञ

जैसा की हम लोग जानते हैं देश को आजादी दिलाने वाले सत्य,अहिंसा की प्रतिमूर्ति महात्मा गांधी के जन्म स्थान पोरबंदर में 108 कुंडिय गायत्री महायज्ञ हुआ। गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति की शुभ अवसर पर 25 दिसंबर 2023 को अखिल विश्व गायत्री परिवार के युवा प्रतिनिधि,हजारों युवाओं का मार्गदर्शन करने वाले,देव संस्कृत विश्वविद्यालय को कुलपति डॉक्टर चिन्मय पंड्या ने हजारों साधकों को संबोधित किया।

ऐसे पवन स्थल पर कुलपति डॉक्टर चिन्म्या पंड्या ने कहा श्रद्धा और समर्पण बढ़ाकर गुरु चरणों में समर्पित होकर भगवान के कार्य को करने के लिए आगे बढ़ते रहना चाहिए। डॉक्टर पांडे ने कहा कि सब कुछ छीना जा सकता है, परंतु श्रद्धा,समर्पण को कोई नहीं छीन सकता,और उन्होंने बड़े ही पावन मन से कहा- प्रसाद के रूप में भगवान का आशीर्वाद लेकर जाना है। और उन्होंने गायत्री का पूजन कर परिजनों से भेंट की.

क्या है 108 कुंडीय महायज्ञ का महत्व

देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति और ब्रह्म वर्चस्व शोध संस्थान के विशेषज्ञों ने इस यज्ञ को लेकर काफी रिसर्च किए हैं। लंबे समय तक इस यज्ञ के सकारात्मक परिणाम को देखते हुए काफी शोध किए हैं। ऐसी मान्यता है कि इस महायज्ञ के होने से महायज्ञ स्थल के आसपास तीन-चार किलोमीटर के दायरे में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है।

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इस ऊर्जा का प्रभाव जल, वायु, प्राणी, पेड़ पौधों पर देखने को मिलता है। इस यज्ञ के फल स्वरुप लोगों के विचारों में भी परिवर्तन आने लगते हैं। महायज्ञ के धुएं से बैक्टीरिया और वायरस नष्ट होते हैं। धुएं की परत वायुमंडल में जमा हो जाती है और जब बारिश होती है तो वायुमंडल में जमा धोने के कारण मिट्टी में आकर मिलते हैं जो की फसलों में प्रजनन बढ़ाने में मदद करते हैं।

जब इस एन को हम सेवन करते हैं तो हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होती है। यज्ञ की भस्म माथे पर लगाने से कई प्रकार की रोग दूर होते हैं यज्ञ से लोगों के मां के चिंतन पर भी असर पड़ता है। शांतिकुंज हरिद्वार स्थित ब्रह्म वर्चस्व शोध संस्थान के विशेषज्ञ ओंकार सी पाटीदार ने बताया कि यज्ञ का सूक्ष्म रूप से बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है।

महात्मा गांधी का जन्म स्थल है पोरबंदर

पोरबंदर भारत के गुजरात राज्य में स्थित है। बात करें पोरबंदर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की तो यह कई कारणो से प्रसिद्ध है। यह महात्मा गांधी का जन्म स्थल है। पोरबंदर के लोग और संस्कृति इस शहर को और भी खास बनाते हैं।

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यहां के लोगों ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखते हुए विरासत को और अधिक आगे बढ़ाया है। जो इन्हें महात्मा गांधी जैसे लोगों द्वारा प्रदान की गई थी। पोरबंदर शहर एक विकसित शहर है। यह भारत का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह भी है।

पोरबंदर के लोग कलात्मक हस्तकला और वास्तुकला में काफी रुचि रखते हैं। पोरबंदर के लोग ज्यादातर कृषि, मछली पकड़ने, खनिज उद्योगों में लगे हुए रहते हैं। प्रसिद्ध डांडिया डांस राज्य भर के हर सांस्कृतिक उत्सव में प्रदर्शित किया जाता है।

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