22वीं बरसी के अवसर पर संसद पर हुआ हमला, धुंए की आड़ में आरोपियों ने किया सुरक्षा पर काबू

Lok Sabha Security Breach: क्या अब भारतीय संसद की सुरक्षा संकट में है? इस प्रश्न का जवाब हाल ही में हुए घटनाओं ने देने का प्रतीत हो रहा है। भारतीय संसद, जो हमारे देश की लोकतंत्र की महत्त्वपूर्ण धारा है। इसमें आज एक बड़ी घटित हुई है। इस घटनाक्रम ने दिखाया है कि संसद की सुरक्षा में कितनी कमी है और इस दिशा में सोचने की आवश्यकता है।

आज यानि बुधवार को शून्यकाल के दौरान एक बड़ा सुरक्षा उल्लंघन हुआ। दोपहर 1.02 बजे संसद में दो व्यक्ति धुएं का सहारा लेकर लोकसभा गैलरी से कूद गए और लोकसभा कक्ष में भाग गए। सदन के सीसीटीवी सिस्टम में भी इसका फुटेज रिकॉर्ड हुआ है।

रिकॉर्ड की गई फुटेज में दो व्यक्ति दिखाई दे रहे हैं, इसमें से एक व्यक्ति गहरे नीले रंग की शर्ट पहने हुए दिख रहा है। दोनों में से एक व्यक्ति लोकसभा गैलरी में धुआं छिड़क रहा था, जबकि एक अन्य व्यक्ति सुरक्षाकर्मी की पकड़ से बचने के लिए डेस्क के पार छलांग लगाता हुआ दिखाई दे रहा है। इस तरह कुछ ही देर में दोनों व्यक्तियों को सांसदों और सुरक्षा कर्मचारियों को काबू में कर लिया।

अभी तक की गई जाँच में सामने आया है कि दोनों में से एक आरोपी का नाम सागर है। घटना के कारण लोकसभा की कार्यवाही को बीच में ही स्थगित कर दिया गया था। इसके बाद दोपहर 2 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अध्यक्षता में फिर से मीटिंग शुरू हुई।

इस दौरान अध्यक्ष ओम बिरला ने इस घटना पर एक संक्षिप्त बयान दिया। लोकसभा अध्यक्ष ने सभी सांसदों से कहा कि, ”हम मामले की जांच कर रहे हैं और दिल्ली पुलिस को जांच में शामिल होने के लिए कहा है।”

संसद की 22वीं बरसी पर हुई घटना

13 दिसंबर यानि आज संसद की 22वीं बरसी है और इसी दिन आरोपियों ने संसद भवन की सुरक्षा को चकमा देकर उस पर हमला किया। इस घटना ने सबको हैरान कर दिया है। सभी सांसद इस घटना के बाद बेहद डरे हुए हैं और उनका कहना है कि यह अनुभव काफी डरावना था।

धुएं की आड़ में किया सुरक्षा का उल्ल्घंन

घटना के दौरान चल रही मीटिंग को राजेंद्र अग्रवाल संभाल रहे थे। इस कार्यवाही के दौरान संसद में मौजूद सांसदों का कहना है, कि दोनों युवकों में से एक शख्स ने गैस छोड़ी, जबकि दूसरा बेंच को ठोक रहा था। वह लोग ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ का नारा भी लगा रहे थे।

लोकसभा में हुई धुआं भरी घटना ने संसद की सुरक्षा को चुनौती दी। इस घटना ने संसद में उथल-पुथल मचा दी और सवाल उठे कि संसद की सुरक्षा इतनी कमजोर कैसे हो सकती है। इस घटना ने संसद की सुरक्षा के बारे में चिंता और उसकी महत्ता को और भी बढ़ा दिया।

संसद की सुरक्षा एक महत्त्वपूर्ण मुद्दा है जो हमारे लोकतंत्र की नींव को मजबूत बनाता है। यहाँ हमारे लोकतंत्र के महत्वपूर्ण मुद्दों का फैसला लिया जाता है। संसद में बहसें होती हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा का सवाल नहीं होना चाहिए।

संसद में सुरक्षा उच्च स्तर पर होनी चाहिए। इसके लिए सख्त कदम उठाने चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की होने से पहले ही रोकी जा सके। बता दें कि इससे पहले भी साल 2001 में 13 दिसंबर को संसद पर हमला हुआ चूका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *