आखिर क्यों मनाते हे Dhanteras? धनतेरस की गाथा: इतिहास, कारण और परंपराएं

धनतेरस, जिसे ‘धनत्रयोदशी’ के नाम से भी जाना जाता है, दिवाली के पांच दिवसीय उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन को धन की देवी, माँ लक्ष्मी और आयुर्वेद के देवता, भगवान धन्वंतरि की पूजा के लिए मनाया जाता है।

इतिहास:

Dhanteras का इतिहास समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा हुआ है, जिसमें देवता और असुरों ने मिलकर समुद्र को मथा था। मान्यता है कि इस मंथन से कई अमूल्य वस्तुएं और देवता प्रकट हुए थे, जिनमें से एक थे धन्वंतरि। वे अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे, जिससे देवताओं को अमरता का वरदान मिला।

कारण:

Dhanteras का दिन स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण है। लोग इस दिन नए वस्त्र, गहने, धातु की वस्तुएं और खासतौर पर सोना और चांदी खरीदते हैं क्योंकि यह माना जाता है कि ऐसा करने से धन्वंतरि और लक्ष्मी माँ की कृपा प्राप्त होती है और यह धन और सेहत के लिए शुभ होता है।

परंपराएं और रिवाज:

Dhanteras? धनतेरस की गाथा

धनतेरस पर परंपरागत रीति-रिवाजों का विशेष महत्व है। घरों को साफ-सुथरा कर दीपों से सजाया जाता है, और रंगोली बनाकर आगंतुकों का स्वागत किया जाता है। दीपों की रोशनी से अंधकार पर विजय प्राप्त करने की भावना का प्रदर्शन होता है।

पूजा विधि और मुहूर्त:

Dhanteras पर विशेष पूजा विधि का पालन किया जाता है। इस दिन माँ लक्ष्मी और धन्वंतरि की मूर्तियों या चित्रों की पूजा की जाती है। इस वर्ष पूजा का मुहूर्त शाम के समय है, जब घरों में दीप जलाकर और प्रसाद अर्पित करके देवी-देवताओं का आह्वान किया जाता है।

धनतेरस का संदेश:

धनतेरस का संदेश स्पष्ट है – धन और स्वास्थ्य की सहजता से प्राप्ति और उन्हें संजो कर रखना। यह त्योहार हमें यह भी सिखाता है कि वास्तविक समृद्धि उन चीजों में नहीं है जो हम खरीदते हैं, बल्कि उन संबंधों में है जो हम निभाते हैं और उस संतोष में है जो हम अपने दैनिक जीवन में महसूस करते हैं।

इस प्रकार, धनतेरस का उत्सव न केवल भौतिक समृद्धि बल्कि आरोग्यता और दीर्घायु की कामना का भी दिन है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि स्वास्थ्य और धन दोनों ही जीवन में सुख और संतोष के लिए आवश्यक हैं।

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