Ekadashi 2024: जाने कब होगी साल की पहली एकादशीइस व्रत के करने से होते हैं सारे काम सफल

Ekadashi 2024: सफला एकादशी 2024 की पहली एकादशी होगी। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत के करने से सारे काम सफल होते हैं। सफला एकादशी कल यानी की 7 जनवरी को मनाई जाएगी यह एकादशी पौष माह के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। इस व्रत को करने से नौकरी व्यापार शिक्षा संबंधित आदि क्षेत्रों में काफी सफलता मिलती है।

क्या है सफला एकादशी का महत्व


सफला एकादशी के दिन भगवान अच्युत और भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि सप्लाई एकादशी की रात जागरण करने से भी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है। इस दिन लोग पूजा, हवन और भंडारा आदि भी करते हैं, गरीब और ब्राह्मण को भोजन भी करवाते हैं। अगर इस व्रत को पूरे विधि विधान से किया जाए तो ऐसी मान्यता है की मृत्यु के बाद मनुष्य को विष्णु लोक की प्राप्ति होती है तथा इसके साथ ही जीवन भी सुखद होता है।

जाने सफला एकादशी से जुड़ी रोचक कहानी

सफला एकादशी से जुड़ी एक कहानी है जो काफी प्रसिद्ध है। प्राचीन कथाओं के अनुसार प्राचीन काल में चंपावती नगरी थी जिसमें माहिष्मान नामक एक राजा अपने चार पुत्रों के साथ रहते थे। चारों पुत्रों में उनका बड़ा पुत्र महा पापी और दुष्ट था।

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वह हमेशा कुकर्मों में रहता था और देवी देवताओं की निंदा करता था जिससे क्रोध में आकर उनके पिता ने राज्य से बेदखल कर दिया इसके बाद उनका बेटा जंगल में रहकर मांस खाकर अपना जीवन यापन कर रहा था। जंगल में रहते हुए एक भिषण ठंड पड़ी जिसके कारण वह रात में सो नहीं पाया।

रात भर कप्ता रहा और बेहोश होकर गिर गया। उस दिन पौष मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि थी। अगले दिन जब वह होश में आया तो अपने किए हुए बुरे कर्मों का उसे काफी पछतावा हुआ जिसके बाद उसने जंगल से कुछ फल इकट्ठा किया और पीपल के पेड़ के नीचे खाया और भगवान विष्णु का नाम स्मरण किया। उस रात भी काफी ठंड पड़ रही थी जिस कारण वह पूरी रात भगवान का नाम जपता रहा। इस प्रकार उसने गलती से ही सही मगर एकादशी का व्रत पूरा किया।

मिली पापों से मुक्ति

सफला एकादशी का व्रत पूरे करने के बाद राजा के बड़े बेटे को विष्णु जी ने सभी पापों से मुक्त कर दिया। और वह फिर से अपने पिता के पास रहने लगा। पिता ने सारी बात जानकर राज्य की जिम्मेदारी अपने बड़े बेटे को सौंप दिया वन की ओर निकल गए। राजा के बड़े बेटे ने भी वृद्धावस्था तक शास्त्र के अनुसार राज पाठ चलाया और वह भी अंत में वन में जाकर विष्णु जी की पूजा की, एकादशी व्रत के फल स्वरुप मोक्ष को प्राप्त हुआ। तभी से ऐसी मान्यता बनी हुई है की सफला एकादशी से सारे कार्य सफल होते हैं और सिद्ध होते हैं।

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सफला एकादशी का शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार सफला एकादशी पौष माह की कृष्णा तिथि को मनाई जाती है और इस वर्ष यह एकादशी 7 जनवरी को रात 12:41 पर शुरू होगी और इसका समापन 8 जनवरी को रात 12:46 पर होगी।

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