हाथ जोड़कर प्रणाम करने से होती है, इन धार्मिक, ज्योतिषीय और वैज्ञानिक लाभों की प्राप्ति, जानें प्रणाम करने का सही तरीका

Benefits of Folded Hands in Hindu Shastra: भारतीय संस्कृति में प्रार्थना का महत्व अत्यधिक माना जाता है। हाथ जोड़कर प्रार्थना करना यहाँ की संस्कृति का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय संस्कृति में प्रार्थना को बहुत ही सराहा गया है क्योंकि यह मानवता के उत्कृष्टतम गुणों में से एक है।

प्रार्थना करते समय हाथ जोड़ना या नमस्ते करना आवश्यक होता है। इसी से एक भावनात्मक संपर्क की शुरुआत होती है जो हमें हमारे भगवान या उच्चतम शक्ति से जोड़ती है। यह एक प्रकार की श्रद्धा और समर्थन का प्रतीक होता है।

भारतीय संस्कृति में प्रणाम करने के कई लाभों के बारे में बताया गया है। इसका केवल धार्मिक ही नहीं बल्कि ज्योतिषीय और वैज्ञानिक शिक्षा में भी उल्लेख मिलता है। आइये जानते हैं, प्रणाम करने के लाभों और प्रणाम करने का सही तरीके के बारे में।

प्रणाम के अन्य नाम

प्रणाम के कई नाम हैं। प्रणाम को सामान्य भाषा में नमस्कार, नमस्ते , नमस्कारम, नमन और अभिवादन के नाम से भी जाना जाता है।

संस्कृत के शब्द से निकला है, नमस्कार

जैसा कि हमने अभी बताया प्रणाम को नमस्ते या नमस्कार भी कहा जाता है और नमस्कार का उद्भव संस्कृत भाषा के शब्द से हुआ है। नमस्कार दो शब्दों से मिलकर बना है, ‘नमः’ और साकार। यहाँ संस्कृत शब्द नमः का अर्थ है नमन करना और साकार का अर्थ है किसी इच्छा या वरदान का पूर्ण होना होता है।

धार्मिक और ज्योतिषीय शास्त्रों में प्रणाम का महत्व

प्रार्थना का महत्व हर धर्म में होता है, लेकिन भारतीय संस्कृति में इसे विशेष रूप से महत्त्व दिया जाता है। यहाँ की संस्कृति में प्रार्थना को व्यक्तिगत सफलता, संतुष्टि और भगवान के साथ व्यक्तिगत संबंध का माध्यम माना जाता है। भारतीय संस्कृति में प्रार्थना को रोजाना की आवश्यकता माना जाता है।

सुबह और शाम की प्रार्थना के अलावा, कई त्योहारों और उत्सवों में भी लोग समृद्धि और सुख-शांति की कामना के लिए प्रार्थना करते हैं। यहाँ की संस्कृति में प्रार्थना को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जो हमें उच्च सोच, सच्चे उद्देश्यों और नेक भावनाओं की ओर ले जाता है।

भारतीय संस्कृति में प्रार्थना का एक और महत्त्वपूर्ण पहलू है – ध्यान और आत्मा के निरंतर विकास का माध्यम। प्रार्थना करने से हम अपने आत्मा की ऊर्जा को ऊंचाईयों तक ले जाते हैं। यह हमें मानवीय गुणों को बढ़ावा देता है और हमें एक उच्च स्तरीय व्यक्ति बनाने की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करता है।

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प्रणाम के वैज्ञानिक महत्व

हाथ जोड़कर प्रार्थना करने से जुड़ी एक और महत्त्वपूर्ण बात है – समर्थन और साझा भावना। जब हम समूह में प्रार्थना करते हैं, तो हम अपने साथीदारों के साथ जुड़ते हैं और साझा भावना को महसूस करते हैं। यह हमें एक एकता और सामूहिक भावना की भावना देता है, जो सामाजिक और आध्यात्मिक एकता की दिशा में हमें एक साथ ले जाता है।

प्रणाम करने के विभिन्न तरीके

  • साष्टांग नमस्कार: जब जमीन पर लेटकर, दोनों हाथों को सिर से आगे की ओर ले जाकर नमस्ते की अवस्था में रखें, तो वह साष्टांग नमस्कार कहलाता है।
  • पद नमस्कार: यदि किसी के पैर छूकर नमस्कार करें न कि हाथ जोड़कर, तो उस नमस्कार को पद नमस्कार कहा जाता है। यह अक्सर अपने से बड़ों के लिए ही किया जाता है।
  • सामान्य नमस्कार: यदि किसी व्यक्ति से मिलते समय दोनों हाथों को जोड़कर नमस्कार किया जाता है, तो इसे सामान्य नमस्कार कहा जाता है।

प्रणाम करने का सही तरीका

प्रणाम करते समय यह बेहद आवश्यक है कि उसे सही तरीके से किया जाए। प्रणाम करते समय दोनों हाथों को इस तरह जोड़े की दोनों हाथों की उंगलियां एक के ऊपर एक हो। इस दौरान दोनों हाथों की उंगलियां हथेलियां एक-दूसरे से चिपकी हुई होनी चाहिए और दोनों हाथों के अंगूठे भी एक-दूसरे से और उंगलियों से सटे हुए होना चाहिए।

यह प्रणाम करने का बिल्कुल सही तरीका है। प्रणाम करते समय कुछ नियमों का पालन करना चाहिए। यह नियम निम्नलिखित हैं।

  • हमेशा दोनों हाथों से नमस्कार करें।
  • नमस्कार करते समय कभी गर्दन या सिर नहीं झुकाए।
  • ध्यान रहे प्रणाम करते समय दोनों हाथों की उंगलियां एक के ऊपर एक हो।
  • दोनों हाथों की हथेलियां और अंगूठा एक-दूसरे से सटा होना चाहिए।
  • प्रणाम करते समय हाथों को हमेशा खाली रखना चाहिए।

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