Aditya L 1: इसरो ने एक बार फिर रचा इतिहास, सूर्य मिशन आदित्य एल 1 पहुंचा सूर्य के नजदीक

Aditya L 1: चंद्रयान-3 के सफलता पूर्वक उतरने के बाद इसरो ने एक और इतिहास रच दिया है। इसरो का पहला सूर्य मिशन आदित्य एल 1 शनिवार को सूर्य के काफी नजदीक पहुंच गया वह सूर्य के लैग्रेंज पॉइंट में दाखिल हो गया है। बता दे की आदित्य एल 1 2023 में आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लांच किया गया था। और आज वह अपने आखिरी प्रक्रिया से सफलतापूर्वक गुजरा। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया और अपनी खुशी जाहिर की।

प्रधानमंत्री ने कहा इसरो ने हासिल किया एक और माइलस्टोन

सूर्य मिशन आदित्य एल 1 के लैग्रेंज पॉइंट पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट किया और इसरो की इस सफलता पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह यह मिशन सभी अंतरिक्ष मिशनों में से सबसे अधिक जटिल है जिसे पूरा करने में हमारे वैज्ञानिकों का अथक प्रयास और समर्पण है। उन्होंने आगे कहा कि मैं देशवासियों के साथ इस असाधारण उपलब्धि की सराहना करता और मानवता के लिए विज्ञान की इस नई दिशा में आगे बढ़ते रहेंगे। वहीं केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने भी इस सफलता पर खुशी जाहिर की।

क्या होता है लैग्रेंज पॉइंट

लैंग्रेज पॉइंट वह स्थान है जहां से पृथ्वी और सूर्य के बीच लग रहे गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव खत्म हो जाता है।
आदित्य एल1 अपने तय पॉइंट एल1 पर पहुंच गया है जहां अब यह रहकर लगभग 5 साल तक सूर्य के बारे में अध्ययन करेगा।

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आदित्य एल1 की पूरी यात्रा

सितंबर 2023 को लॉन्च करने के बाद यह 16 दिनों तक धरती के चारों ओर चक्कर काटता रहा। इसके चक्कर काटते रहने के दौरान पांच बार ऑर्बिटर बदला गया ताकि इसे सही गति मिल सके। इसके बाद आदित्य को ट्रांस लैरेंजियन वन ऑर्बिट में भेजा गया। इसके बाद यह 109 दिनों की लंबी यात्रा किया। आदित्य जैसे ही एल 1 पर पहुंचा उसकी एक ऑर्बिट मैन्युवरिंग कराई गई ताकि एल 1 पॉइंट के चारों तरफ मौजूद हेलो ऑर्बिट में चक्कर लगा सके।

क्या है आदित्य एल1 का उद्देश्य

बात करें आदित्य एल1 के उद्देश्य की तो मिशन का लक्ष्य सूर्य का अध्ययन करना है। यह सूर्य के आसपास रहकर उसमें हो रही गतिविधियों विशेष कर सूर्य के परिमंडल की गर्मी, सूर्य की सतह पर सौर भूकंप और सूर्य के गर्म होने से जुड़ी गतिविधियों और अंतरिक्ष में मौसम संबंधित समस्याओं का अध्ययन करेगा।

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क्यों चुनौती पूर्ण होता है सूर्य का अध्ययन करना

आपको बता दे कि सूर्य का अध्ययन करना काफी चुनौती पूर्ण कार्य है जिसे भारत के इसरो द्वारा भेजे गए आदित्य एल1 द्वारा किया जा रहा है। यह मिशन चुनौती पूर्ण इसलिए है क्योंकि सूर्य के सतह का तापमान लगभग 9941 डिग्री फारेनहाइट है, और अब तक सूर्य के बाहरी कोरोना का तापमान भी नापा नहीं जा सका है। इसी को देखते हुए आदित्य एल1 को पृथ्वी और सूर्य के बीच की कुल दूरी का लगभग एक प्रतिशत यानी की 15 लाख किलोमीटर की दूरी पर स्थित एल1 की कक्षा में स्थापित किया गया है।

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